मृत्यु का सार
न कोई गुँजन
न कोई हलचल
ये कैसा अचेत सा दिख रहा
ये सारी दिशाएं
खोई खोई
धरती भी प्यासी प्यासी है
सारा अनंत है
मौन खड़ा
फिर मौत ने एक परचम लहराया
और
जीत लिया एक जीवन को
एक सार ब्रह्म सा बिखर गया
जीवन को एक आधार मिला
उस परम ज्ञान का सार मिला
फिर
नमन किया उस संगम को
और
रूप मिला नव चेतन को।
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