Thursday, April 5, 2018

यादें 


रंगो से भरी तस्वीरें हैं 
आँखों से बंधी उम्मीदे हैं 
ये अफ़साने हैं यादों के 
जो साथ हमारे रहते हैं 

ये यादें इतनी गहरी हैं 
पल में आँखें भर आती हैं 
नज़राना सब की चाहत का 
बस यादों के सहारे बाकी है 

यादें एहसास का दामन हैं 
एहसास बन के तड़पाती हैं 
यादों में बसे  उन रिश्तों को 
आंसू बनके सहलाती हैं 

यादों से बने ये रिश्ते हैं 
रिश्तों से जुडी ये यादें हैं 
हम बिखरे न शीशों की तरह 
इसलिए ये यादें बाकी हैं